देवभूमि उत्तराखंड खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय पैरा शूटर अभिनव देशवाल ने अपनी खामोशी को ऐसी ताकत बनाया कि अब वह अपने अचूके निशाने से इतिहास लिख रहे हैं। 19 वर्षीय अभिनव की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि वह बोल और सुन नहीं सकते। इसके बावजूद उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को कभी अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया।
शांत स्वभाव और अटूट आत्मविश्वास के साथ उन्होंने निशानेबाजी में ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसने उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। अभिनव के पिता मनोज देशवाल पेशे से शिक्षक हैं। उन्हाेंने कहा कि परिवार का नाम रोशन करने के साथ अभिनव ने उन तमाम खिलाड़ियों को संदेश दिया है जो किसी न किसी चुनौती के बावजूद खेलों में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। अभिनव ने साबित किया है कि सफलता के लिए परिस्थितियां नहीं, बल्कि हौसला और निरंतर मेहनत मायने रखती है।