देहरादून(ब्यूरो)-मध्य हिमालयी राज्य उत्तराखंड में आपदा नियति नहीं है, बल्कि उसके जोखिम को न्यून करना सामूहिक जिम्मेदारी है। प्राकृतिक घटनाओं में इनके जोखिम पैटर्न को समझना होगा कि आखिर राज्य इतना संवेदनशील क्यों है। इसके आकलन को तीन प्रमुख बिंदु जियोलाजी, ज्योग्राफी व क्लाइमेट हैं, जिनकी अनदेखी पर एक अवरोध भी जोखिम का सबब बन जाता है। मानवीय दखल व अन्य कारण, प्राकृतिक घटनाओं को आपदा का स्वरूप देते हैं।